भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: 25% जुर्माना हटाया गया, रूसी तेल आयात पर निगरानी जारी
भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क 7 फरवरी को सुबह 12:01 बजे (अमेरिकी समय) से हटा लिया गया है। भारत में यह समय 10:31 बजे सुबह का था।
रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत पर लगाए गए इस 25 प्रतिशत जुर्माने को ट्रंप प्रशासन ने छह महीने बाद खत्म करने का फैसला किया। इसके लिए शनिवार को एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) जारी किया गया।
अमेरिकी सरकार ने कहा कि भारत ने यह भरोसा दिया है कि वह अब रूस से सीधे या परोक्ष रूप से तेल आयात नहीं करेगा। साथ ही भारत अमेरिका से ऊर्जा उत्पाद खरीदेगा और अगले 10 वर्षों के लिए अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने पर भी सहमत हुआ है।
हालांकि जुर्माना हटा दिया गया है, लेकिन अमेरिका ने यह देखने के लिए एक निगरानी व्यवस्था बनाई है कि भारत भविष्य में दोबारा रूसी तेल तो नहीं खरीदता।
रूसी तेल आयात रोकना, अमेरिका से ऊर्जा खरीदना और रक्षा सहयोग बढ़ाना — ये तीनों बातें भारत-अमेरिका के बड़े रणनीतिक समझौते का हिस्सा हैं।
रूसी तेल को लेकर इस घोषणा पर भारत सरकार की ओर से तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। लेकिन 5 फरवरी को विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अलग-अलग देशों से तेल खरीदने की नीति अपना रहा है। मंत्रालय ने साफ किया कि 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा सुरक्षा भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और फैसले बाजार की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए लिए जाते हैं।
शनिवार को भी सरकारी अधिकारियों ने विदेश मंत्रालय के इसी बयान को दोहराया और कहा कि भारत की सारी नीतियां इसी सोच के साथ बनाई जाती हैं।
ट्रंप द्वारा जारी आदेश का शीर्षक था — “रूसी सरकार से अमेरिका को होने वाले खतरों से निपटने के लिए शुल्क में बदलाव”। इसमें कहा गया कि रूस की नीतियां अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के लिए खतरा बनी हुई हैं। इसी कारण पहले भारत से आने वाले सामान पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था, क्योंकि उस समय भारत रूसी तेल खरीद रहा था।
आदेश में आगे कहा गया कि अब भारत ने रूसी तेल आयात बंद करने, अमेरिका से ऊर्जा खरीदने और रक्षा सहयोग बढ़ाने का वादा किया है। इन कदमों को देखते हुए अमेरिका ने यह जुर्माना हटाने का फैसला किया।
आदेश के मुताबिक, 7 फरवरी 2026 के बाद अमेरिका में आयात होने वाले भारतीय उत्पादों पर अब 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा।
हालांकि अमेरिका ने साफ किया है कि वह भारत के रूसी तेल आयात पर नजर रखेगा। अगर भारत दोबारा रूसी तेल खरीदता है, तो अमेरिका फिर से 25 प्रतिशत शुल्क लगाने पर विचार कर सकता है।
यह फैसला भारत के लिए कूटनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण है। यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूस से तेल खरीद बढ़ा दी थी, क्योंकि रूस सस्ते दामों पर तेल दे रहा था। भारत का तर्क था कि वह महंगाई को काबू में रखने के लिए सबसे सस्ते विकल्प से तेल खरीद रहा है और तेल खरीदने का फैसला सरकारी नहीं बल्कि तेल कंपनियों का होता है।
यह नीति तब तक चली जब तक ट्रंप दोबारा राष्ट्रपति बने। रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने में नाकाम रहने के बाद ट्रंप ने रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर दबाव बनाना शुरू किया। इसका असर भारत पर भी पड़ा और 25 प्रतिशत शुल्क लगाया गया।
पिछले कुछ महीनों में भारत का रूसी तेल आयात लगातार घटा है और अब यह तीन साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। जून 2025 में जहां भारत रूस से रोजाना 20.9 लाख बैरल तेल खरीद रहा था, वहीं जनवरी 2026 में यह घटकर 11.6 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। यह जानकारी कमोडिटी मार्केट एनालिटिक्स कंपनी केप्लर के आंकड़ों से मिली है।
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