Jaaved Jaaferi: एआर रहमान के बयान पर जावेद जाफरी की राय, बोले— ‘दुनिया की तरह बॉलीवुड भी बदल गया है’


 

एआर रहमान के बयान पर जावेद जाफरी की राय, बोले— ‘दुनिया की तरह बॉलीवुड भी बदल गया है’

हाल ही में एआर रहमान ने कहा था कि पिछले आठ सालों में उन्हें कम काम मिला है, क्योंकि फिल्म इंडस्ट्री धीरे-धीरे साम्प्रदायिक होती जा रही है। उनके इस बयान के बाद काफी विवाद हुआ। कई कलाकारों ने इस पर अपनी राय रखी—कुछ ने समर्थन किया तो कुछ ने असहमति जताई। अब अभिनेता जावेद जाफरी ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है।

जावेद जाफरी ने कहा कि जैसे देश और दुनिया बदल रही है, वैसे ही फिल्म इंडस्ट्री में भी बदलाव आया है।

‘इंडस्ट्री भी दुनिया की तरह बदल गई है’

आईएएनएस से बातचीत में जावेद जाफरी ने कहा,
“इंडस्ट्री बदल गई है, जैसे पूरी दुनिया बदल गई है। डिजिटल, एआई—सब कुछ बदल रहा है। फैशन बदल रहा है, खाना बदल रहा है, सोच और मूल्य बदल रहे हैं। कहानियां सुनाने का तरीका भी बदल गया है। मैंने हाल ही में सुना कि जेन ज़ी और अल्फा की ध्यान देने की क्षमता सिर्फ 6 सेकंड की रह गई है।”

उन्होंने आगे कहा कि आज चैनल हेड्स मानते हैं कि अगर 6 सेकंड में दर्शक का ध्यान नहीं खींच पाए, तो कंटेंट खत्म समझो। आज तेजी से बदलाव हो रहा है। अब फिल्मों में सिर्फ कहानी नहीं, बल्कि बिजनेस और आंकड़ों का भी बड़ा रोल है। अब लोग फिल्म नहीं, प्रोजेक्ट बनाते हैं।

मनोज मुंतशिर ने रहमान के बयान से जताई असहमति
वहीं लेखक मनोज मुंतशिर ने एआर रहमान के बयान को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड के तीन सबसे बड़े सुपरस्टार—सलमान खान, शाहरुख खान और आमिर खान—तीनों मुस्लिम हैं। देश के मशहूर लेखक और शायर जैसे जावेद अख्तर, साहिर लुधियानवी और मजरूह सुल्तानपुरी भी इसी इंडस्ट्री का हिस्सा रहे हैं। भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी भी मोहम्मद अजहरुद्दीन कर चुके हैं। ऐसे में भेदभाव की बात सही नहीं लगती।

उन्होंने कहा कि किसी भी हिंदी फिल्म के क्रेडिट्स देख लें, वहां करीब 250 लोगों के नाम होते हैं। अगर ध्यान से देखें तो किसी एक धर्म को तरजीह देने का कोई सबूत नहीं मिलेगा।

‘पठान और जवान जैसी फिल्मों ने रिकॉर्ड तोड़े’
मनोज मुंतशिर ने यह भी कहा कि पिछले आठ सालों में शाहरुख खान की फिल्में ‘पठान’ और ‘जवान’ ने बॉक्स ऑफिस पर सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। उन्होंने कहा कि यह देश अपने कलाकारों को उनके काम के आधार पर प्यार करता है। अगर काम अच्छा हो, तो लोग कलाकारों को सिर आंखों पर बैठाते हैं।

उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि भारत की पहचान समावेशिता है और किसी भी तरह के भेदभाव पर वह विश्वास नहीं करते।

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